वीर पुत्री समाज का उजाला

एक औरत थी जिसका नाम नीलम था और एक युवक था जिसका नाम सुशील था । दोनों ही पति – पत्नी का स्वभाव शांत और निस्वार्थ था वह बहुत ही गरीब थे उनके हर खुशी नहीं दे पा रहा था । अपनी संतानों की चार संतान थी । वह अपने परिवार इच्छा की पूर्ति करने में असमर्थ था उसकी दो पुत्र और दो पुत्री थी जिसमें बड़ी लड़की का दयालु पूर्वक था । काफी बुद्धिमान और चंचल स्वभाव स्वभाव बेहद था । उसका नाम मनु था । उसने सभी लोग प्यार से मनु पुकारते थे । उसका पिता एक अमीर मालिक के यहाँ काम करता था । प्यार और दयालु पूर्वक का व्यवहार करता था । मालिक वह मालिक उसे युवक से बेहद की कोई संतान नहीं थी । इसलिए वह उस युवक की लड़की को गोद लेना चाहता था । वह मालिक सुशील से बोला कि तुम अपनी मनु को हमें गोद दे दो ! क्योंकि हमारी कोई संतान नहीं है । इसलिए हम आपकी पुत्री को गोद चाहते है । सुगील अपनी मालिक की बात को निरादर नही करना चाहता था । वह मालिक की बात से सहमत हो जाता है और अपनी में मालिक को बेटी दे देता है तब से पुत्री मालिक की छाव में रहने लगती है । काफी मन चंचल और बुद्धिमान से मालिक के मन मे कर देती है वह अपनी बेटी की तरह उसका ख्याल रखते है उसे किसी भी चीज की कमी नहीं होने देते है । उसके पढ़ाई लिखाई का विशेष ध्यान रखते है । वह मनु – वेहद लगन से पढ़ाई करती है । और अपने लक्ष बनाकर बढ़ने की कोशिश में लग जाती है और आगे चलकर बनकर अपने माता – पिता का सिर गर्व से ऊँचा D.M र देती है । ऐसी बेटी पर मुझे नाज है । जो दुनिया में कुछ करके देखायो सकती है ।

2 thoughts on “वीर पुत्री समाज का उजाला”

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top